आदिवासी अंचल की हवाओं से होगी बिजली पैदा
रतलाम : मंगलवार, 18 सितम्बर, 2007
आपको यह सुनकर बड़ा ही आचार्य हो रहा होगा कि आदिवासी अंचल की हवाएं अब बिजली पैदा करेगी, लेकिन चौकिए नहीं यह बात बिलकुल सत्य है कि अब बहुत जल्द ही आदिवासी अंचल में चलने वाली हवाओं से प्राइवेट कम्पनियां पवन चक्की के माध्यम से बिजली पैदा करेगी।
बिजली उत्पादक कम्पनी उत्पन्न बिजली प्राइवेट कम्पनियों के उपयोग में देगी। ग्रामीण क्षेत्रों को इससे कोई फायदा नहीं होगा। खेर जो भी हो परंतु यह इस विकास खण्ड का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि करोड़ों का विकास कार्य इस क्षेत्र में होगा। इससे आदिवासी लोगों के रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेगी। अगर कम्पनी ग्रामीण क्षेत्र को बिजली देती है तो इस क्षेत्र से बिजली की कमी भी दूर होगी।
यह कंपनी का अपना प्रोजेक्ट है। बिजली विभाग को सिर्फ इससे राजस्व की वृध्दि जरूर होगी। कंपनी यहां मशीन लगाकर किसी भी फर्म को बेच सकती है। उससे जो बिजली पैदा होगी वह एमपीईबी के सिस्टम में डाली जाएगी और वहां से ऑनर फर्म को बिजली सप्लाय होगी। इसके एवज में एमपीईबी फर्म से चार रुपए प्रति यूनिट शुल्क वसूलेगी।
नोट - लेख में प्रकाशित विचार लेखक के अपने हैं जरूरी नहीं कि जनसम्पर्क विभाग का भी यही दृष्टिकोण हो।
सं.सं.स.
मनीष पराले , रतलाम email-manish_parale@rediffmail.com