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आदिवासी अंचल की हवाओं से होगी बिजली पैदा

रतलाम : मंगलवार, 18 सितम्बर, 2007

आपको यह सुनकर बड़ा ही आचार्य हो रहा होगा कि आदिवासी अंचल की हवाएं अब बिजली पैदा करेगी, लेकिन चौकिए नहीं यह बात बिलकुल सत्य है कि अब बहुत जल्द ही आदिवासी अंचल में चलने वाली हवाओं से प्राइवेट कम्पनियां पवन चक्की के माध्यम से बिजली पैदा करेगी।

सैलाना विकासखण्ड की पहाड़ियों पर अब प्राइवेट बिजली उत्पादक कम्पनी सुजलोन की नजर पड़ चुकी है, कंपनी द्वारा सैलाना विकास खण्ड की पहाड़ियों का सर्वे भी कर लिया गया है और पिछले 7 दिनों से इस दिशा के लिए कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। सुजलोन कम्पनी द्वारा सैलाना विकासखण्ड के ग्राम गोपाल पुरिया, इसरथुनी, रामपुरिया, पलसोड़ी व शिवगढ़ जैसी पंचायतों को पहली नजर में पवन चक्की लगाने के लिए चुना है। सुजलोन कम्पनी द्वारा सैलाना ग्रीड 132 केवी से गोपाल एरिया तक पवन चक्की से उत्पन्न ऊ र्जा को लाने के लिए मेगा पावर नामक प्राइवेट कम्पनी को बिजली के पोल लगाने का ठेका दिया है। मेगा पावर कम्पनी द्वारा पिछले 7 दिनों से विद्युत पोल लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया है जो लगभग एक माह में पूर्ण हो सकेगा।

बिजली उत्पादक कम्पनी उत्पन्न बिजली प्राइवेट कम्पनियों के उपयोग में देगी। ग्रामीण क्षेत्रों को इससे कोई फायदा नहीं होगा। खेर जो भी हो परंतु यह इस विकास खण्ड का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि करोड़ों का विकास कार्य इस क्षेत्र में होगा। इससे आदिवासी लोगों के रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेगी। अगर कम्पनी ग्रामीण क्षेत्र को बिजली देती है तो इस क्षेत्र से बिजली की कमी भी दूर होगी।

यह कंपनी का अपना प्रोजेक्ट है। बिजली विभाग को सिर्फ इससे राजस्व की वृध्दि जरूर होगी। कंपनी यहां मशीन लगाकर किसी भी फर्म को बेच सकती है। उससे जो बिजली पैदा होगी वह एमपीईबी के सिस्टम में डाली जाएगी और वहां से ऑनर फर्म को बिजली सप्लाय होगी। इसके एवज में एमपीईबी फर्म से चार रुपए प्रति यूनिट शुल्क वसूलेगी।

नोट - लेख में प्रकाशित विचार लेखक के अपने हैं जरूरी नहीं कि जनसम्पर्क विभाग का भी यही दृष्टिकोण हो।

सं.सं.स.

मनीष पराले , रतलाम 
email-manish_parale@rediffmail.com

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