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मध्यप्रदेश
बनाने
के लिए
की जा
रही
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
की
यात्रा
के अब
कई
अक्स
उभर
रहे
हैं।
मानवीय
सरोकारों
को
लेकर
श्री
चौहान
ने इस
दौरान
यह
साबित
कर
दिया
है कि
उनके
और
लोगों
के बीच
अब
फासले
जैसी
कोई
बात
रही
नहीं
है। हर
दिल
में
झाँक
कर
तकलीफों
को
बाँटने
की जो
अनुभूति
उन्होंने
कराई
है
उसमें
कहीं
उनके
ह्रदय
के तार
भी
झंकृत
हुए
हैं
पीड़ाओं,
कष्टों
की बात
सुन और
जानकर।
श्री
चौहान
फिलहाल
अपनी
मंज़िल
की तरफ
जा रहे
हैं,
इसलिए
जो कुछ
इस
दौरान
उन्होंने
अपने
भीतर
सहेज
लिया
है वो
आगे
निश्चित
ही
सार्थक
परिणामों
में
बदलेगा।
यात्रा
के
तीसरे
चरण
बैतूल
जिले
में कल
मंगलवार
को
अनेक
जगहों
पर
लोगों
से
मिलने
के बाद
आज फिर
वहीं
उनकी
नई
सुबह
इसी
सिलसिले
के साथ
शुरू
हुई।
फिर
से
थामी
झाड़ू
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
जनपद
पंचायत
बैतूल
के
साकादेही
गांव
की
गलियों
में
गुज़रते
हुए आज
फिर
अपने
हाथों
में
झाड़ू
थामी।
असल
में
इसके
पीछे
उनका
मकसद
लोगों
को यह
हौसला
देना
था कि
उन्हें
बेझिझक
अपने
आसपास
के
माहौल
को
स्वच्छ
और
स्वस्थ
रखने
के
लिये
खुद भी
जिम्मा
उठाना
चाहिये।
बस फिर
क्या
था,
देखते-देखते
लोगों
का
हुजूम
वहां
इकट्ठा
हो गया
और
हरएक
ने
अपने
हाथों
में
झाड़ू
लेकर
सड़क
की
सफाई
करने
में
देरी
नहीं
की।
तालाब
में
मशक्कत
यात्रा
के
पड़ावों
को तय
करते
हुए
साकादेही
गांव
के ही
एक छोर
पर
अचानक
उनकी
नज़रें
तालाब
पर
पड़ीं
जहां
कुछ
लोग
निर्माण
में
जुटे
हुए
थे।
पलक
झपकते
मुख्यमंत्री
इस
तालाब
के पास
पहुंचे
और
बगैर
किसी
भूमिका
या
औपचारिकता
के
तालाब
निर्माण
की
मशक्कत
में
खुद भी
शामिल
हो
गये।
झण्डी
दिखाने
की बात
मुख्यमंत्री
का
साकादेही
में
अगला
ठिकाना
उस जगह
था
जहां
उन्हें
मध्यप्रदेश
बनाओ
यात्रा
के रथ
और
साइकिल
सवारों
के एक
जत्थे
को
रवानगी
देनी
थी।
चूंकि
यह
उनकी
अपनी
यात्रा
का एक
अहम
हिस्सा
और
गतिविधि
है
लिहाजा
मुख्यमंत्री
ने इस
काम को
भी
बड़े
सलीके
और
सम्मान
के साथ
अंज़ाम
दिया।
रेशमा
के
इलाज
से
नहीं
झिझक
साकादेही
में
मुख्यमंत्री
का एक
लम्बा
पड़ाव
था
इसलिये
उन्होंने
वहां
रात भी
गुजारी।
इस
दौरान
ही
उनके
ध्यान
में एक
चार
वर्ष
की
बच्ची
रेशमा
की
पीड़ा
को जब
लाया
गया तो
उन्होंने
छूटते
से
उसके
लिये
दोनों
कृत्रिम
पैरों
के
इंतज़ाम
का
बीड़ा
उठाया।
यह
बच्ची
दुर्भाग्यवश
दोनों
पैरों
से
विकलांग
है।
मुख्यमंत्री
ने उसे
अपनी
गोद
में
उठाया
और
दुलारा
भी।
गांव
की
आंगनवाड़ी
में जब
वे
निरीक्षण
के
लिये
पहुंचे
तो
वहां
के
कर्ताधर्ताओं
को यह
नसीहत
देने
से
उन्होंने
परहेज
नहीं
किया
कि
गरीब
बच्चों
के
पोष्टिक
आहार
से कोई
छेड़खानी
न हो
जाए।
गांव
में ही
उन्होंने
लाड़ली
लक्ष्मी
योजना
के
राष्ट्रीय
बचत
पत्र
भी
बांटे।
साकादेही
में
रात
धीरे-धीरे
शबाब
पर आ
रही थी
लेकिन
मुख्यमंत्री
की
आंखों
से
नींद
कोसों
दूर
थी।
सिर्फ
लेटे
रहकर
करवटें
बदलना
उन्होंने
उचित
नहीं
समझा
और
वहां
जमा
हुए
लोगों
से
अत्यंत
आत्मीयता
के साथ
एक
निकट
परिजन
की तरह
मुखातिब
हुए।
उन्होंने
कहा कि
प्रदेश
के हर
गांव
की
तरक्की
उनकी
शपथ है
और
फैसला
भी।
इसे
ईमानदारी
से
अंज़ाम
देने
में
कोई
गुस्ताखी
भी
नहीं
होगी।
लेकिन
अगर इस
मुहिम
में उस
गांव
का
हरएक
व्यक्ति
भी एक
संभव
संकल्प
के साथ
यदि
जुड़
गया तो
सारा
स्वप्न
पूरा
करना
बेहद
आसान
हो
जायेगा।
लोग
उनकी
इस बात
को न
सिर्फ
ध्यान
से
सुनते
रहे
बल्कि
अंदर
ही
अंदर
यह
प्रतिज्ञा
करते
जान
पड़े
कि
विकास
की इस
राह
में
मुख्यमंत्री
के साथ
हमकदम
होने
के
लिये
वे कोई
कसर
नहीं
छोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री
के साथ
इस
यात्रा
में
जनसंपर्क
मंत्री
श्री
लक्ष्मीकांत
शर्मा,
आदिम
जाति
कल्याण
मंत्री
कुँवर
विजय
शाह,
सांसद
श्रीमती
ज्योति
धुर्वे,
क्षेत्र
के
विधायक
और
प्रशासनिक
अधिकारी
भी
मौजूद
थे।
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