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सक्सेस स्टोरीज

मुख्यमंत्री स्व-रोजगार योजना से बैग-बस्ता निर्माण दुकान के मालिक बने गनपत

भोपाल : मंगलवार, फरवरी 27, 2018, 16:59 IST

जबलपुर में युवा गनपत बचपन में और बच्चों की तरह स्कूल बैग लेकर पढ़ाई करने स्कूल जाना चाहते थे। माता-पिता के असमय निधन और परिवार की विपन्न स्थितियों के चलते उनकी यह अभिलाषा अधूरी ही रह गई। सातवीं कक्षा के बाद उनका स्कूल छूट गया और उन्हें हालात से समझौता कर बैग-बस्ता निर्माण की दुकान में मजदूरी करने पर विवश होना पड़ा। इस सब के बावजूद गनपत ने हिम्मत नहीं हारी। आज मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत हासिल ऋण से खरीदी गई चार मशीनों से वे बड़ी तादाद में बच्चों के लिए स्कूल बैग, यात्रियों के लिए ट्रैवलिंग बैग और महिलाओं के लिए लेडीज पर्स बना रहे हैं।

गनपत ने 14-15 वर्ष की उम्र तक बैग-बस्ता निर्माण की एक दुकान पर मजदूरी की। विवाह होने के बाद पांच सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का खर्च निकाल पाना दुष्कर हो गया था। स्वयं का व्यवसाय करना चाहते थे, लेकिन पूंजी के अभाव में खुद को लाचार पाते थे। एक दिन अखबार में पढ़ा कि सरकार की एक योजना में अनुसूचित जाति के लोगों को अन्त्यावसायी दफ्तर से लोन दिया जाता है। गनपत कलेक्ट्रेट स्थित अन्त्यावसायी समिति के कार्यालय पहुंचे और वहां के अधिकारियों को अपनी मंशा बताई। अधिकारियों ने पूरी मदद की, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जल्द ही उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत तीन लाख रूपए का ऋण मंजूर हो गया। इसमें 90 हजार रूपए की मार्जिन मनी भी शामिल थी।

ऋण से गनपत ने किराए पर दुकान लेकर कच्चा माल खरीदा और बैग निर्माण के लिए चार मशीनें लगाईं। अब वे बड़ी संख्या में बैग बनाते हैं और बड़ी दुकानों को सप्लाई करते हैं। बैग निर्माण से सम्बन्धित पूरा काम पहले से ही जानने के कारण उन्हें इस काम में प्रवीणता हासिल है। अब तो गनपत का 18 वर्षीय बेटा भी काम में उनकी मदद करता है। यही नहीं, उन्होंने दो नौजवानों को भी बैग निर्माण के अपने कारखाने में रोजगार दिया है। गनपत बताते हैं कि कच्चा माल खरीदने, कारीगरों को मेहनताना देने और पांच हजार रूपए की बैंक किश्त चुकाने के बाद भी उन्हें महीने में सात हजार रूपए से अधिक की विशुद्ध आय हो जाती है।

अब गनपत अपने व्यवसाय को बड़ा स्वरूप देने के लिए पूरे हौसले के साथ जुटे हैं। उनका सपना है कि उनकी खुद की दुकान हो, मशीनों की संख्या बढ़ाई जाए तथा वे और अधिक संख्या में कारीगर रख सकें, ताकि बैग निर्माण का काम बड़े पैमाने पर किया जा सके। वे इसे लेकर बेहद आशान्वित भी हैं। भोपाल में हाल ही में आयोजित स्वरोजगार मेले में गनपत ने भी अपना बैग का स्टाल लगाया था। मुख्यमंत्री ने स्वयं उनके स्टाल पर पहुंचकर उनसे बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया था।

गनपत कहते हैं कि मुख्यमंत्री की योजना से मुझे खुद का बिजनेस जमाने का मौका मिला। बेरोजगारों को ऐसे ही सहारा मिलता रहेगा, तो उनकी तरक्की सुनिश्चित है।

सक्सेस स्टोरी (जबलपुर)


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