सक्सेस स्टोरीज

सुदूरवर्ती वन-ग्रामों में 70 साल बाद पहुंची बिजली

भोपाल : मंगलवार, दिसम्बर 26, 2017, 14:09 IST

नरसिंहपुर जिले के सुदूरवर्ती वन क्षेत्र के 10 गांव आजादी के सत्तर साल बाद भी बिजली की रोशनी से अछूते थे। जिले के विकासखंड चीचली एवं चारंवरपाठा के अंतर्गत ये गांव भैंसा, मुकुंदा, बड़ागांव, छींदखेड़ा, कोटरी, सांवरी, भिलमाढाना राजस्व ग्राम, भिलमाढाना वन ग्राम, टुईयापानी एवं गनेशनगर हैं। घने जंगलों के बीच बसे इन टोलों ने धीरे-धीरे गांव का रूप तो ले लिया, यहां स्कूल बन गये, सरकारी योजनाओं की पहुंच भी हो गई, लेकिन बिजली पहुंचाने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा।

पहाड़ की टेकरी के ऊपर बसे इन ग्रामों में विद्युत लाइन ले जाना अत्यंत दुष्कर कार्य था। इसके लिये पहले भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति ली गई। वनक्षति पूर्ति के रूप में पौधारोपण के लिए 126 लाख रूपये की राशि वन विभाग में जमा की गई। कलेक्टर द्वारा पौधारोपण के लिए सवा 6 एकड़ जमीन वन विभाग को आवंटित की गई। इसके बाद वन विभाग ने अनुमति दी। तब जाकर इन गांवों में विद्युतीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया।

इन वन-ग्रामों तक बिजली पहुंचाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत लगभग 6 करोड़ 86 लाख रूपये की लागत से बिजली की अधोसंरचना का निर्माण किया गया और 62 कि.मी. 11 केव्ही लाइन, 10 कि.मी. एलटी लाइन एवं 14 विद्युत ट्रांसफार्मर आदि उपकरण स्थापित किये गये। निर्धारित समय के पहले ही वन-ग्रामों को रोशन कर दिया गया है।

वन-ग्राम सांवरी के निवासी सौ वर्षीय वृद्ध आदिवासी सुकलू ठाकुर कहते है 'बिजली के बारे में सुना तो था, अब जिंदगी में पहली बार गांव में बिजली को देख भी लिया है, दिन जैसा उजाला होता है।' इसी गांव की राजकुमारी बाई, गंगाबाई, रामकुमारी, कमलावती, नन्हीबाई, भूरी बाई, दक्खन आदि सभी ने एक स्वर में कहा कि बिजली आने से गांव में खुशहाली आ गई है। गांव में जल्द ही आटा चक्की लगेगी और उन्हें गेंहूँ पिसाने के लिए जंगली क्षेत्र के दुगर्म रास्तों से दूर तक नहीं जाना पड़ेगा।

पिछले दिनों क्षेत्रीय विधायक श्री संजय शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संदीप पटेल और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र फौजदार जब बिजली का शुभारंभ करने ग्राम सांवरी पहुंचे तो वन ग्राम के लोगों ने खूब स्वागत किया और लोक नृत्य के माध्यम से अपनी खुशी जाहिर की।

सफलता की कहानी (नरसिंहपुर)


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