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इंजीनियरिंग छोड़ उन्नत खेती कर रहे अतुल

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 23, 2017, 19:17 IST
 

परम्परागत और उन्नत खेती का फर्क हरदा जिले के सौताड़ा गाँव में देखा जा सकता है। इस गाँव के युवा किसान अतुल बारंगे ने अपनी आधा एकड़ जमीन में उन्नत खेती के नये प्रयोग से सफलता हासिल की है। अतुल की गाँव में लगभग 30 एकड़ जमीन है। इस जमीन पर परिवार के लोग कई वर्ष से पारम्परिक खेती करते थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे अतुल का मन गाँव के खेतों में भटकता रहता था। पिता अकेले खेती सम्हाल रहे थे। एक दिन अतुल ने पढ़ाई छोड़ी और किसान बनने की ठानी। अतुल ने उपलब्ध साधनों से उन्नत खेती शुरू की।

मध्यप्रदेश सरकार के उद्यानिकी मिशन से सन 2015 में 50 प्रतिशत अनुदान पर 25-25 डिसमिल के दो पॉली-हाउस बनवाये। एक पाली-हाउस में नौ लाख 35 हजार रुपये का खर्च आया। मध्यप्रदेश सरकार की उद्यानिकी मिशन की संरक्षित खेती योजना के माध्यम से अतुल को 50 प्रतिशत अनुदान मिला। आज अतुल निरंतर इटेलियन खेरे की फसल ले रहे हैं। करीब 25 डिस्मिल में 2500 से 2800 खीरे का बीज लगता है। इसका मूल्य लगभग 15 हजार रुपये है। इतना ही खाद और स्प्रे पर खर्च आता है। खीरा 45 दिन में मार्केट में बेचने लायक हो जाता है। उत्पादन भी 45 से 50 दिन तक होता है। बीज अपने पूरे समय में कम से कम 800 किलो और अधिकतम 1200 किलो का उत्पादन देता है। बाजार भाव 12 से 30 रुपये प्रति किलो तक मिलता है। कम समय में और कम जमीन में अच्छा उत्पादन और मुनाफा होता है।

अब अतुल नौकरी से बेहतर उन्नत खेती को मानते हैं। उनका मानना है कि नौकरी के लिये हर दिन आठ घंटे खपाने से बेहतर उतना समय अपनी खेती को दिया जाये तो अच्दी आमदनी निश्चित ही मिलती है। आज अतुल 30 एकड़ में मिश्रित खेती करते हैं। सब्जी और अन्य फसल लगाते हैं। कोशिश रहती है कि रासायनिक खाद के स्थान पर जैविक खाद का ही प्रयोग करें।

आज गाँव में इस परिवार का आलीशान घर है। खेती के सभी आधुनिक साधन हैं इनके पास। खुद का गोबर गैस प्लांट तथा गौ-वंशीय पशु हैं। पूरा परिवार सम्पन्न तथा खुशहाल जिंदगी जी रहा है।

 सफलता की कहानी (हरदा)


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