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बिड़ी बनाने वाले हाथ अब बेल रहे खुशबू

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 23, 2017, 19:16 IST

सागर जिले के मालथौन विकासखण्ड के बरोदिया चंद्रपुर ग्राम की समूह से जुड़ी महिलाओं ने अब दशकों से चली आ रही बीड़ी बनाने की पंरपरा को तोडते हुये रोटी कमाने का नया जरिया शुरू किया है। इस ग्राम में 150 से अधिक परिवार है। जो खेती के साथ-साथ बीड़ी मजदूरी करते है। इस ग्राम में 4 महिला स्वयं सहायता समूहों का आजीविका मिशन के अंतर्गत गठन किया गया है। लक्ष्मी समूह में 12 महिलायें, शारदा और सीता समूह में 11-11 महिलायें, एवं जय माता समूह में 12 महिलायें समूह से जुड़ी है। ये महिलायें अपनी साप्ताहिक बैठक में 10 रूपये की बचत कर अपने खाते में जमा करती हैं।

प्रेमरानी अहिरवार जो लक्ष्मी समूह की सदस्य है और मिडिल स्कूल परीक्षा पास है। उनका कहना है कि बीड़ी बनाने में तम्बाकू की धांस से सिर दर्द, आखो में जलन, बदन दर्द होता है। इस कार्य से जुड़ी ज्यादातर महिलाओं को आखों की कमजोरी, बदन दर्द और स्वास्थ्य कमजोरी की लगातार शिकायतें रहती है, लेकिन आजीविका कमाने के लिये दूसरा विकल्प उन्हे नही सूझ रहा था। आजीविका मिशन के माध्यम से इन महिलाओं को अगरबत्ती बनाकर आजीविका ब्रांड में बेचना अथवा बाईवेक सिस्टम के तहत् अगरबत्ती का निर्माण कर कच्ची अगरबत्ती को सीधा सप्लाई करना बताया गया। समूह से जूडी 43 महिलाओं ने इस कार्य को बीड़ी छोडकर अपनाया। उन्होने अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीद ली हैं जिस पर वे आसानी से बैठकर अपनी आमदनी को 200 रूपया प्रतिदिन तक कर सकते है। समूह से जुड़ी सुलोचना अहिरवार, पुष्पा अहिरवार, वर्षा अहिरवार, उमेदी अहिरवार, शिवानी, अशोकरानी अहिरवार अब अगरबत्ती के काम से खुश हैं। वे कहती है की हमारे घर मे अब खुशबू फैली रहती है, हमे अपने काम पर अब गर्व है। वे आजीविका मिशन से जुड़कर अगरबत्ती के साथ-साथ आजीविका के नये आयाम शुरू करना चाहती है।

सफलता की कहानी (सागर)


महेश दुबे
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