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खेती की बजाए पशुपालन को आर्थिक समृद्धि का जरिया बनाया रतनलाल ने

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 23, 2017, 19:14 IST

नीमच जिले की मनासा तहसील के गाँव चुकनी के किसान रतनलाल पाटीदार ने कृषि कार्य की बजाए पशुपालन को अपने परिवार की खुशहाली और समृद्धि का जरिया बनाया है। पहले रतनलाल परम्परागत खेती करके जैसे-तैसे अपने घर का गुजर-बसर कर पाते थे।

किसान रतनलाल की मुलाकात अपने क्षेत्र के प्रगतिशील पशुपालक किशन पाटीदार से हुई। प्रगतिशील पशुपालक ने उन्हें परम्परागत खेती के अलावा पशुपालन की तरफ ध्यान देने की भी बात कही। रतनलाल ने बैंक ऋण लेकर सबसे पहले 2 शंकर नस्ल की गाय खरीदीं। शुरूआत में उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन की आय होने लगी। किसान रतनलाल ने क्षेत्र के वेटनरी डॉक्टर राजेश पाटीदार के मार्गदर्शन में पशुपालन व्यवसाय को और आगे बढ़ाया। कुछ ही वर्ष के अंतर में किसान रतनलाल के पास उन्नत नस्ल की 10 गाय हो गईं। इससे उन्हें 900 रुपये प्रतिदिन की आय होने लगी। रतनलाल ने दूध और गोबर की खाद से हुई आमदनी से एक मारुति कार भी खरीद ली। रतनलाल ने मारुति कार पर यह लिखवा रखा है कि 'गौ-माता की देन''। आगे चलकर किसान रतनलाल ने कुछ और उन्नत नस्ल के पशु खरीदे। आज वे दिन भर में 70 लीटर दूध साँची दुग्ध संघ को नियमित रूप से दे रहे हैं। अब उन्हें 1500 रुपये प्रतिदिन की आमदनी हो रही है। दूध के अलावा अब वे साल भर में करीब डेढ़ लाख रुपये की गोबर खाद भी बेच लेते हैं।

आज रतनलाल और उनका परिवार पशुपालन व्यवसाय को अपना कर बेहद खुश है। उनकी आर्थिक तरक्की से क्षेत्र के आसपास के किसान भी प्रभावित हैं।

सफलता की कहानी (नीमच)


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