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विश्व जल दिवस और नमामि देवि नर्मदे सेवा यात्रा का महत्व - शिवराजसिंह चौहान

भोपाल : मंगलवार, मार्च 21, 2017, 22:32 IST

विश्व जल दिवस 22 मार्च को पूरे विश्व में मनाया जायेगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के संरक्षण के विश्व के सबसे बड़े अभियान के बारे में बात करना प्रासंगिक है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने जल संरक्षण के सम्बन्ध में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 22 मार्च को विश्व जल दिवस घोषित किया था। भारतीय संस्कृति में जल को बहुत अधिक महत्व दिया गया है और इसे विश्व को हमसे सीखने की जरूरत है। हिन्दू संस्कृति में हम विश्वास करते हैं‍कि हमारा पूरा जीवन जन्म से मृत्यु तक जल पर आधारित है। हम सभी उत्सवों और धार्मिक क्रिया-कलापों में जल का उपयोग करते हैं।

'गंगा च यमुने चेवा गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिंधो कावेरी,
जलेस्मिन् सान्निध्यम कुरू'

जल हमारी जीवन-रेखा है और हमारे अस्तित्व का मुख्य आधार है। विश्व की लगभग सभी सभ्यताएँ नदियों के किनारे विकसित और पल्लवित हुई हैं। ऋगवेद में नदी सुक्त का वर्णन है। संत-महात्माओं ने नदियों को जीवनदायिनी, जीवनपोषिणी और जीवन को संरक्षित करने वाली देवी माँ का दर्जा दिया है।

मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि उसे पाँच बड़े नदी कछारों का आशीर्वाद मिला है। प्रदेश में 3900 किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में नदियों का बहाव है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम इस आशीर्वाद को हमेशा के लिये अपने साथ बनाये रखें।

मित्रों, विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में आज जब मैं यह लिख रहा हूँ तो जल एक तेजी से घटते हुए संसाधन में बदल रहा है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 3000 क्यूबिक लीटर से घटकर 1123 क्यूबिक लीटर रह गई है। दूसरी ओर प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता का वैश्विक औसत 6000 क्यूबिक लीटर है। भारत में घटती प्रतिव्यक्ति जल उपलब्धता आज हमारे लिये चिन्ता का विषय है। बढ़ती हुई जनसंख्या के अलावा लोगों द्वारा पानी का बड़ी मात्रा में दुरूपयोग इसका मुख्य कारण है। हम जानते हैं कि आने वाले वर्षों में जल की माँग और बढ़ेगी। इस बढ़ती माँग का सामना करने के लिये हमें हमारे जल संसाधनों का किफायती उपयोग करना सीखना होगा। इस परिस्थिति में जल संरक्षण की उपयोगिता और बढ़ जाती है। भावी पीढ़ियों के लिये हमारी नदियों को संरक्षित रखने की महत्ता को समझते हुए ही मेरी सरकार ने 11 दिसम्बर 2016 से नर्मदा सेवा यात्रा शुरू की है।

यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा है। यह भारतीय उप महाद्वीप की पाँचवीं सबसे बड़ी नदी होने के साथ ही भारत की सात पवित्र नदियों में से एक है। नर्मदा सेवा यात्रा का उद्देश्य प्रदेश की इस सबसे बड़ी नदी के संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। आज मुझे प्रसन्नता है कि यह यात्रा एक बड़ा जन-आन्दोलन बन गई है। माँ नर्मदा और उसके परिस्थितिकीय तंत्र को संरक्षित और संवर्धित करने का संकल्प लेने के लिये लोग आगे आ रहे हैं। यात्रा ने पूरे विश्व में करोड़ों लोगों के दिल में जगह बनाई है। माँ नर्मदा को बचाने के इस अभियान में जाति, रंग, वर्ग के भेदभाव के बिना समाज के सभी क्षेत्रों के लोग पूरे मनोयोग से शामिल हो रहे हैं। लोग नर्मदा नदी के दोनों तटों पर बड़ी संख्या में पौध-रोपण कर उनका संरक्षण करने, नर्मदा तटों को अतिक्रमण से मुक्त रखने, नर्मदा जल को प्रदूषण मुक्त रखने और नदी को साफ और स्वच्छ बनाने का संकल्प ले रहे हैं। हमने नर्मदा तटों पर आगामी 2 जुलाई को 10 करोड़ पौधे लगाने की तैयारी की है। हम नर्मदा के किनारों पर कुण्ड का निर्माण कर रहे हैं, जिनमें प्रतिमाओं और पूजन सामग्री का विसर्जन हो सकेगा। इसी तरह नर्मदा किनारों पर प्रदूषण की रोकथाम के लिये मुक्तिधाम (विश्रामघाट) भी बनाये जा रहे हैं।

आदि-काल से नर्मदा में अपने सगे-संबंधियों के शव बहा देने वाले लोग अब ऐसा नहीं करने का संकल्प ले रहे हैं। साथ ही, नदी के आस-पास खुले में शौच करने वाले लोग भी अब शौचालयों का प्रयोग कर रहे हैं। इस तरह नर्मदा के किनारों पर एक बड़ा बदलाव हो रहा है और पूरा विश्व इस बदलाव को महसूस कर रहा है।

नर्मदा संरक्षण के हमारे अभियान को ख्यातनाम लोगों का समर्थन मिला है। इनमें श्री अमिताभ बच्चन, बाबा रामदेव, श्रीश्री रविशंकर, श्री अनूप जलोटा, श्रीमती अनुराधा पौड़वाल और श्री कैलाश सत्यार्थी आदि शामिल हैं। नर्मदा सेवा यात्रा को तिब्बती धर्मगुरू और नोबल शांति पुरस्कार प्राप्त श्री दलाई लामा का आशीर्वाद भी मिला है। श्री लामा ने 19 मार्च को यात्रा में भागीदारी की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के हमारे प्रयासों को न केवल सराहा बल्कि इस अभियान को सफल बनाने के लिये लोगों से इसमें शामिल होने का आव्हान भी किया।

विश्व जल दिवस-2017 की थीम अपशिष्ट जल है। यह संयोग है कि नर्मदा सेवा यात्रा भी अपशिष्ट जल को कम करने और उसे स्वच्छ कर पुन: उपयोग में लेने का अभियान है। पूरे विश्व में 80 प्रतिशत से अधिक अपशिष्ट जल बिना स्वच्छ हुए बहकर परिस्थितिकीय तंत्र को प्रभावित कर रहा है, जो पर्यावरण के लिये बहुत नुकसानदायक है। इस स्थिति को दूर करने के लिये हम सतत और टिकाऊ प्रयास कर रहे हैं। हमने तय किया है कि नर्मदा किनारे के शहरों और गाँवों का सीवेज का गंदा पानी नदी में नहीं मिलने देंगे। इसके लिये ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किये जायेंगे, जो नर्मदा किनारे के गाँवों और शहरों से नर्मदा में मिलने वाले पानी को साफ करेंगे। सीवेज के पानी का उपचार कर साफ पानी किसानों को सिंचाई के लिये दिया जायेगा। अभी तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की तेजी से स्थापना के लिये 18 नगर का चयन कर लिया गया है। इसके लिये 1500 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है।

धर्मगुरू श्री दलाई लामा ने नर्मदा सेवा यात्रा के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये जन-सहभागिता को मुख्य आधार बताया है। यह सही भी है, क्योंकि सरकार इसे अकेले नहीं कर सकती। यात्रा में हमें मध्यप्रदेश के नागरिकों का अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है।

आईये विश्व जल दिवस के इस अवसर पर हम सब सुखद भविष्य के लिये अपने आसपास के जल-स्रोतों के संरक्षण और नर्मदा यात्रा को पूरी तरह से सफल बनाने का संकल्प लें। मैं इस काम में प्रदेशवासियों के समर्थन और सहयोग के लिये आभारी हूँ।

 
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