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ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट-2016

खाद्य प्र-संस्करण विकास के लिये राज्य शासन दृढ़ संकल्पित : मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन

प्रदेश में 6 फूड पार्क स्थापित-राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा
एग्री बिजनेस एण्ड फूड प्रोसेसिंग सत्र सम्पन्न

भोपाल : शनिवार, अक्टूबर 22, 2016, 21:15 IST

किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा है कि खाद्य प्र-संस्करण के विकास के लिये राज्य सरकार दृढ़-संकल्पित है। वर्ष 2005 में एक अलग उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग का गठन किया गया है। होशंगाबाद जिले में एक मल्टी लॉजिस्टिक हब तैयार किया गया है। इस हब में खाद्य प्र-संस्करण इकाइयों की स्थापना के लिये स्थान उपलब्ध है। श्री बिसेन इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2016 में 'एग्री बिजनेस एण्ड फूड प्रोसेसिंग'' सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि सोयाबीन में प्रोटीन का स्तर अधिक है। अत: सोयाबीन उत्पाद सोयाक्रोटीन, सोयाबड़ी, सोया मिल्क, पनीर, दही आदि पर आधारित इकाइयों की स्थापना प्रदेश के सभी जिलों में संभावित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्र-संस्करण योग्य आलू का उत्पादन लिया जाता है। कम शक्कर एवं अधिक ठोस सामग्री प्रदेश में उत्पादित आलू की विशेषता है। अधिकांश कम्पनियों द्वारा प्र-संस्करण योग्य आलू का क्रय मध्यप्रदेश से किया जाता है। किसानों को कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य-पालन, मधुमक्खी पालन तथा अन्य सहायक कृषि उत्पादों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। अधिक उत्पादन और उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ खाद्य प्र-संस्करण अपनाकर आमदनी बढ़ाने के लिये भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उद्यानिकी, खाद्य प्र-संस्करण (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री सूर्यप्रकाश मीणा ने कहा कि उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी फसलें 15.49 लाख हेक्टर क्षेत्र में ली जा रही हैं। फल-फूल,सब्जी, मसालों तथा औषधि एवं सुगंधित फसलों का उत्पादन 247 लाख मीट्रिक टन है। प्रदेश औषधीय एवं सुगंधित फसलों के क्षेत्र में देश में प्रथम तथा मसालों एवं फूलों की खेती में तृतीय स्थान पर है। इन क्षेत्रों में लघु, मझौले और वृहद उद्योग लगाये जाने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं। उत्पादन ही नहीं विपणन और व्यापार, प्र-संस्करण तथा निर्यात के लिये सुलभ सभी परिस्थितियों से मध्यप्रदेश स्वर्णिम संभावनाओं का प्रदेश कहा जा सकता है।

श्री मीणा ने कहा कि भारत में खाद्य प्र-संस्करण उद्योग में विदेशी निवेश लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 11 एग्रो क्लाईमेटिक जोन हैं। इस विविधता के कारण सभी कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों का उत्पादन प्रदेश में कृषकों द्वारा किया जाता है। उद्यानिकी एवं वानिकी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में कृषि जोत उच्चतम सीमा अधिनियम 1960 में उपयुक्त संशोधन किए गए हैं। निजी उद्यमियों, सहकारी एवं अन्य कंपनियों को उद्यानिकी फसलें बोने के लिये प्रोत्साहित करने की दृष्टि से भूमि की अधिकतम जोत सीमा में छूट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। श्री मीणा ने कहा कि प्रदेश में खाद्य प्र-संस्करण उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिये 6 फूड पार्क की स्थापना की गयी है।

द्वितीय सत्र में 'खाद्य प्र-संस्करण एवं विपणन के क्षेत्र में निवेश'' पर श्री प्रवेश शर्मा, संयुक्त सचिव फूड प्रोसेसिंग, भारत सरकार, श्री प्रकाश और श्री अनुराग अग्रवाल ने प्रेजेन्टेशन दिया। प्रमुख सचिव उद्यानिकी, खाद्य प्र-संस्करण श्री अशोक वर्णवाल ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी।

अपर मुख्य सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी.मीना, प्रमुख सचिव श्री राजेश राजौरा और राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री राकेश श्रीवास्तव उपस्थित थे।

 
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