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सिंहस्थ - समाचार

  

सिंहस्थ में कला उत्सव सांस्कृतिक महाकुंभ में कलाकारों की प्रस्तुति को सराहा श्रद्धालुओं ने

भोपाल : शुक्रवार, मई 20, 2016, 21:39 IST

उज्जैन में सिंहस्थ के साथ कला उत्सव सांस्कृतिक महाकुंभ भी समापन पर है। सिंहस्थ आने वाले श्रद्धालुओं ने कला उत्सव में विभिन्न राज्य की लोक संस्कृति, नाट्य, वादन एवं स्थानीय नृत्यों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया है।

उज्जैन सिंहस्थ मेला परिसर में जारी कला उत्सव, केन्द्र एवं राज्य सरकार के सांस्कृतिक विभाग,राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली एवं दक्षिण मध्यक्षेत्र सांस्कृतिक केंन्द्र नागपुर के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा हैं। एक साथ 7 मंच पर कला उत्सव हुआ। विभिन्न मंच पर कलाकारों के द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गई थी।

भरतमुनि मंच पर देश के सुप्रतिष्ठित बाँसुरी वादक श्री संतोष संत का बाँसुरी वादन हुआ। इसके बाद संस्कार मंच, उज्जैन के तत्वावधान में महानाट्य रामलीला में भरत मिलाप, सीता हरण एवं सबरी नवदा प्रसंग का सुंदर मंचन किया गया। इसे देखने दूर-दूर से बड़ी संख्या में आये दर्शक-श्रोता उपस्थित रहे। अगली प्रस्तुति गायन की नई दिल्ली के सुश्री कुमुद दीवान ने प्रस्तुत किया। इसके बाद सागर के कलाकारों ने नौरता नृत्य की प्रस्तुति दी। अंत में श्री निरपत पटेल का लोक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

त्रिवेणी संग्रहालय में श्री रीतेश-रजनीश मिश्र बंधुओं का गायन हुआ। इसके बाद उज्जैन की सुश्री पलक पटवर्धन का कथक नृत्य, श्री अरूण मोरोने का सितार वादन, श्री चन्द्रमाधव बारीक का शक्ति बेले एवं अन्त में श्री भूषण असाटी भोपाल द्वारा अपने ग्रुप के साथ भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी गई।

विक्रमादित्य मंच, गढ़कालिका में सर्वप्रथम नृत्य की सभा हुई। इसे सुश्री असावरी पंवार ने अपने साथी कलाकारों के साथ प्रस्तुत की। इसके बाद पण्डित राजन कुलकर्णी और पण्डित सारंग कुलकर्णी का सरोद वादन हुआ। बाद में सी.सी.आर.टी. द्वारा छात्रवृत्ति प्राप्त कलाकारों में सुश्री जी. उमा का वायलिन वादन एवं सुश्री पूर्वी टोनपे का गायन हुआ। श्री विक्रांत जैन के निर्देशन में नाट्य प्रस्तुति इतिहास के दो सूर्य का मंचन किया गया। अन्त में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। इसमें सर्वश्री डॉ. सरिता शर्मा (दिल्ली), पूनम वर्मा (मथुरा), अशोक चारण (जयपुर), आशीष अनल (लखीमपुर), सुदीप भोला (धार), अशोक सुंदरानी (सतना), सुश्री तुषा शर्मा (मेरठ), गजेन्द्र सोलंकी (दिल्ली) द्वारा सहभागिता की गई।

कालिदास मंच में पहली प्रस्तुति कथक नृत्य से की गई। इसे श्री आशीष गोपीनाथ कहालेकर ने 20 कलाकारों के साथ आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया। मथुरा से आये कलाकारों द्वारा नरसी का भात का मंचन किया गया। भोपाल की संस्था द राइजिंग सोसायटी ऑफ आर्ट एण्ड कल्चर के निर्देशन में नाटक-सूतनजातक का मंचन किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयोजन में श्री डी.पी. सिन्हा के निर्देशन में नाटक-रक्त अभिषेक का मंचन किया गया। भोपाल के श्री मित्र कला संगम द्वारा साथी कलाकारों के साथ भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी गई। अन्त में रीवा की मण्डली श्री शारदा रामलीला द्वारा श्री रामलीला का मंचन किया गया।

भोज मंच, सदावल रोड पर कला-उत्सव में सर्वप्रथम श्री संदीप द्विवेदी का सूफी गायन, सुश्री पूर्णिमा रॉय का सुगम संगीत, सुश्री यशस्वी गुप्ता का भजन गायन हुआ। विभिन्न राज्य के पारम्परिक लोकनृत्य की प्रस्तुति हुई। इनमें श्री अर्जुन सिंह धुर्वे एवं ग्रुप द्वारा बैगा परधौनी लोकनृत्य, श्री नत्थीलाल नौटियाल द्वारा उत्तराखण्ड के लोकनृत्य, श्री सुरेन्द्र सिंह द्वारा हरियाणा के लोकनृत्य, श्री मुकेश कुमार द्वारा फरवई नृत्य, श्री बनारसी द्वारा करमा नृत्य एवं अंत में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर के संयोजन में संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित पण्डित नाथराव नेरालकर का भजन गायन हुआ।

भर्तृहरि मंच, भूखीमाता में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संयोजन नार्थ ईस्ट जोन कल्चरल सेंटर द्वारा संयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से किया गया। श्री बाबूलाल गंधर्व का बेला वादन, सुश्री पलक तिवारी का कथक नृत्य, श्री मोहम्मद रहीमउद्दीन का लोकगायन, श्री अब्दुल हमीद खाँ का वायलिन वादन एवं अंत में सचिन कुमार मालवी, छिंदवाड़ा के निर्देशन में नाटक मुमताज भाई पतंग वाले का मंचन गया।

वाराहमिहिर मंच, पर कला उत्सव में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ।

 
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