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भोपाल : रविवार, सितम्बर 13, 2015, 19:19 IST

संसदीय प्रक्रियाओं से अवगत करवाने के लिये हिन्दी में पुस्तकों का प्रकाशन

विश्व हिन्दी सम्मेलन में प्रदर्शित की गई पुस्तकें

 

भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड में 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में लोकसभा सचिवालय द्वारा जन-सामान्य को संसदीय प्रक्रियाओं से अवगत करवाने के लिये उनके द्वारा प्रकाशित हिन्दी पुस्तकें प्रदर्शित की गई। इन पुस्तकों का प्रदर्शन अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के प्रदर्शनी कक्ष में किया गया।

लोक सभा सचिवालय की अधिकारी सुश्री ऊषा जैन ने बताया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की गणना दुनिया में सबसे बड़ी व्यवस्था में की जाती है। भारत की संसद का गौरवमयी इतिहास रहा है। इस इतिहास से वाकिफ करवाने के लिये लोक सभा सचिवालय द्वारा सरल हिन्दी भाषा में पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छह माही पत्रिका 'संसदीय मंजूषा' के साथ संसदीय प्रक्रियाओं पर केन्द्रित त्रै-मासिक पत्रिका का भी प्रकाशन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आम आदमी भारतीय संसद के सदन लोक सभा और राज्य सभा को समझ सके, इसके लिये लघु-पुस्तिका के रूप में हिन्दी में किताबों का प्रकाशन करवाया गया है। दिल्ली में संसदीय ज्ञानपीठ के हाल में संसदीय संग्रहालय भी प्रारंभ किया गया है। संग्रहालय का अवलोकन व्यक्ति नई दिल्ली पहुँचकर कर सकते हैं। संग्रहालय सरकारी अवकाश के दिनों को छोड़कर प्रात: 11 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है।

विश्व हिन्दी सम्मेलन में जिन पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया उनमें हमारी संसद, संसद भवन सम्पदा, संसद भवन में चित्र, संसद भवन के पारंपरिक स्वरूप का प्रबंधन, लोकसभा में प्रश्नकाल, विधेयक अधिनियम कैसे बनता है, संसद में बजट और संसदीय समितियाँ प्रमुख हैं। इन सब किताबों की बिक्री की व्यवस्था लोक सभा सचिवालय में की गई है। इसके साथ ही इन किताबों को डाक से बुलवाये जाने की व्यवस्था भी है।

लोक सभा पर केन्द्रित पुस्तकों की जानकारी वेबसाइट http://loksabha.nic.in पर भी उपलब्ध है। लोक सभा सचिवालय के सर्वश्री प्रहलाद मुंशी, जे.एस. रावत, रचनजीत सिंह, हर सिंह, शिवकुमार और श्रीमती कीर्तिप्रभा ने भी जन-सामान्य को संसद की गतिविधियों और उनके हिन्दी के प्रकाशन के बारे में अवगत करवाया।

मुकेश मोदी