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"नमामि देवि नर्मदे"-सेवा यात्रा

नर्मदा सेवा यात्रा से जीवन धन्य हो गया

नर्मदा सेवा यात्रियों ने सुनाये संस्मरण 

भोपाल : मंगलवार, मई 9, 2017, 15:28 IST

नर्मदा सेवा यात्रा में लगभग 200 यात्री ऐसे हैं, जो अमरकंटक से गत 11 दिसम्बर से ही साथ चल रहे हैं। यात्रा के समापन चरण में भी उनमे उत्साह में कोई कमी नहीं आयी है।

डिंडौरी जिले के ग्राम टिकरिया निवासी परसोती लाल बताते हैं कि गत 5 महीने से वे लगातार हर दिन सुबह मां नर्मदा के आंचल को साफ रखने के लिए ग्रामीणजन को प्रेरित कर उनके साथ श्रमदान करते हैं। इस दौरान नर्मदा तट पर पड़ी पॉलीथिन की थैलियों, डिस्पोजल गिलास, प्लेटें, गंदे कपड़े, पूजा की पुरानी सामग्री को वहाँ से हटाते हैं। इसके अलावा यात्रा में शामिल सुखिया बाई, प्रेमबाई, बंदू बाई, कमलिया बाई, छोटी बाई, कौशल्या बाई सभी बताती हैं कि नर्मदा सेवा यात्रा में शामिल होकर हमारा तो जीवन धन्य हो गया। सुखिया बाई कहती हैं कि गत 5 माह में प्रदेश के 16 जिलों में जाकर मां नर्मदा के दोनों तटों पर साफ-सफाई व अन्य सेवा कर जो आनंद मिला, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। इस यात्रा के दौरान हर दिन ''राम'' नाम लेखन करना लगभग सभी यात्रियों की नियमित दिनचर्या में शामिल है। सागर जिले की बंडा तहसील के ग्राम चकेरी निवासी रामदास बाबा पूरी यात्रा के दौरान बस में बैठकर दिन-रात माला फेरते रहते हैं। वे बताते हैं कि गत 5 महीनों में गुरु मंत्र की लाखों माला फेर चुके हैं, जो घर में या आश्रम में सम्भव नहीं था। चर्चा के दौरान रामदास बाबा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा नर्मदा सेवा यात्रा करने का निर्णय एक ऐतिहासिक कदम है। इस यात्रा ने प्रदेश एवं देश के करोड़ों लोगों को नदी संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया है।

यात्रा में शामिल देवास जिले के श्री अमर सिंह बताते हैं कि हम लोग रोजाना सुबह नर्मदा तट पर जाकर वहां साबुन लगाकर नहाने वाले व कपड़े धोने वालों को समझाईश देकर ऐसा करने से रोकते हैं। नर्मदा तट के आस-पास शौच करने वालों को डांट-डपट कर वहां से भगाते हैं। डिंडौरी जिले के ग्राम डाडबिछिया निवासी उत्तम सिंह कहते हैं कि ऐसी यात्रा अब तक न हुई, न होगी। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान मंडला जिले में नर्मदा तट पर स्थित ग्वारी ग्राम में उन्हें गर्म पानी का कुंड देखने को भी मिला, ऐसा कुंड आज तक कभी देखा नहीं था।

सिवनी जिले के भोमा कस्बे के निवासी श्री समता लाल साहू ने बताया कि पहले भी वे एक बार पद यात्रा करके मां नर्मदा की परिक्रमा कर चुके हैं, पर इस बार जो आनंद की अनुभूति हुई, वैसी पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मां नर्मदा का जल औषधि गुणों से युक्त है। पिछली पद यात्रा में नदी तट पर फिसल जाने से पैर में चोट लग गई थी, तो पास में दवा न होने से पूरी श्रृद्धा के साथ मां नर्मदा का जल चोट पर लगाया, तो कुछ ही दिन में चोट ठीक हो गई।

सिवनी जिले की घन्सोर तहसील के ग्राम तारागढ़ निवासी श्री पुरुषोत्तम गिरि ने बताया कि वे पहले भी तीन साल, तीन माह, 13 दिन की नर्मदा परिक्रमा अमरकंटक से गुजरात के भरूच तक कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान नर्मदा तट पर बड़े वृक्षों की जड़ों द्वारा पानी सहेजने की बात साक्षात् अनुभव की। वे जब भी नदी किनारे वट वृक्ष के नीचे बैठते थे, तो वहां की मिट्टी में काफी नमी अनुभव हुई और जमीन को जब थोड़ा सा कुरेदा तो पानी के बुलबुले फूटते हुए देखे। पुरुषोत्तम गिरि कहते हैं कि नर्मदा किनारे वृक्ष लगाकर ही नदी में जल संवर्धन किया जा सकता है।

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